24 घंटे में US वापस लौटो: H-1B वीजा होल्डर्स को Amazon, Meta और Microsoft ने भेजा ईमेल
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि आखिर यह मामला क्या है, कंपनियों ने ऐसा फैसला क्यों लिया, इसका असर भारत समेत अन्य देशों पर कैसे पड़ेगा और H-1B वीजा होल्डर्स को आगे क्या करना चाहिए।

H-1B वीजा क्या है?
सबसे पहले समझते हैं कि H-1B वीजा होता क्या है।
यह एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है जो अमेरिका की कंपनियों को विदेशी प्रोफेशनल्स को स्पेशलाइज्ड स्किल्स के लिए हायर करने की अनुमति देता है।
सबसे ज्यादा यह वीजा भारतीय IT इंजीनियर और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के पास होता है।
हर साल लाखों भारतीय इस वीजा के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन सीमित कोटा होने के कारण केवल कुछ ही लोगों को यह वीजा मिलता है।
इसलिए, जिन लोगों को यह वीजा मिलता है उनके लिए यह बहुत कीमती होता है।
कंपनियों ने क्यों दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम?
सूत्रों के मुताबिक, Amazon, Meta और Microsoft ने अपने कर्मचारियों को यह निर्देश इसलिए दिए हैं क्योंकि:
1. कंपनी की पॉलिसी – कोविड-19 महामारी के बाद से बहुत से कर्मचारी रिमोट वर्क कर रहे थे। अब कंपनियां धीरे-धीरे ऑफिस से काम (Work From Office) को अनिवार्य कर रही हैं।
2. US वीजा नियमों का पालन – H-1B वीजा एक शर्त के साथ आता है कि कर्मचारी को अमेरिका में ही उस कंपनी के लिए काम करना होगा, जिसके लिए वीजा जारी हुआ है। यदि कर्मचारी बाहर से काम करता है तो यह नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।
3. जॉब सिक्योरिटी और लीगल रिस्क – अगर कर्मचारी समय पर अमेरिका नहीं लौटते तो कंपनी को जुर्माना या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
इसी कारण कंपनियों ने सख्त रुख अपनाते हुए H-1B वीजा होल्डर्स को तुरंत वापस बुलाने का नोटिस भेजा है।
भारतीय कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा असर
यह खबर भारतीयों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा धारकों में से लगभग 70% से ज्यादा भारतीय हैं। IT इंडस्ट्री में भारतीयों की पकड़ सबसे मजबूत है और यही वजह है कि इस अल्टीमेटम से सबसे ज्यादा चिंता भारतीय परिवारों को हो रही है।
कई भारतीय कर्मचारी छुट्टियों पर भारत आए हुए थे।
कुछ लोग यहां से रिमोट वर्क कर रहे थे।
अब अचानक मिले इस ईमेल ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया है।
24 घंटे में अमेरिका लौटना आसान नहीं है क्योंकि इसमें टिकट बुकिंग, वीजा डॉक्यूमेंट्स, और पारिवारिक जिम्मेदारियों जैसी चुनौतियां शामिल हैं।
सोशल मीडिया पर गुस्सा और चिंता
इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर कई कर्मचारियों और उनके परिवारों ने नाराजगी जताई है।
कुछ लोगों का कहना है कि इतने कम नोटिस में फ्लाइट मिलना मुश्किल है।
कई लोगों ने सवाल उठाए हैं कि कंपनियों को इतना सख्त कदम उठाने से पहले कर्मचारियों को ज्यादा समय देना चाहिए था।
वहीं, कुछ लोग इसे US इमिग्रेशन पॉलिसी की मजबूरी बता रहे हैं।
कंपनियों का नजरिया
Amazon, Meta और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियों का कहना है कि वे सिर्फ कानूनी नियमों का पालन कर रही हैं।
H-1B वीजा की शर्तें बहुत स्पष्ट हैं – कर्मचारी को अमेरिका में फिजिकली प्रेज़ेंट होना चाहिए।
यदि कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करेंगी तो उनका वीजा स्पॉन्सरशिप प्रोग्राम खतरे में पड़ सकता है।
इसलिए उन्होंने मजबूरी में यह कड़ा कदम उठाया।
आगे का रास्ता क्या है?
इस अल्टीमेटम से प्रभावित कर्मचारियों के पास अब कुछ ही विकल्प हैं:
1. तुरंत अमेरिका लौटें – ताकि उनकी नौकरी सुरक्षित रहे।
2. कंपनी से अतिरिक्त समय मांगे – हालांकि संभावना कम है कि कंपनियां ज्यादा समय देंगी।
3. कानूनी सलाह लें – कुछ मामलों में वीजा एक्सटेंशन या रिमोट वर्क की स्पेशल परमिशन ली जा सकती है।
भारत की IT इंडस्ट्री पर असर
अगर यह ट्रेंड आगे भी जारी रहता है तो इसका असर भारत की IT इंडस्ट्री पर भी पड़ेगा।
कई कंपनियां अब Onshore Hiring पर ज्यादा ध्यान देंगी।
भारतीय कंपनियां अमेरिका में अपने कर्मचारियों को लंबे समय तक नहीं रोक पाएंगी।
इससे भारत में ही IT नौकरियों की डिमांड बढ़ सकती है।

