Russia Oil Deal Modi Trump 2025: भारत और रूस के बीच तेल व्यापार को लेकर एक बार फिर से चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में यह सवाल उठाया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल खरीद को लेकर क्या वादा किया था। इस पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ-साफ बयान जारी कर दिया है। MEA ने कहा है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार तेल खरीदता है और इस मामले में किसी बाहरी दबाव में आने वाला नहीं है।
मोदी सरकार का स्पष्ट रुख – भारत पहले अपनी जरूरत देखता है
मोदी सरकार ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि रूस से तेल खरीद का निर्णय भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए लिया गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और उसके लिए सस्ती ऊर्जा बहुत जरूरी है। ऐसे में अगर रूस भारत को सस्ता तेल देता है, तो भारत के पास उसे खरीदने का पूरा अधिकार है। MEA ने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री मोदी हमेशा “India First Policy” पर चलते हैं, और हर फैसला भारत के हित में होता है।

रूस से सस्ता तेल – भारत के लिए बड़ा फायदा
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से पश्चिमी देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। लेकिन भारत ने उस समय रूस से तेल खरीदना जारी रखा, क्योंकि यह सस्ता और स्थिर सप्लाई देने वाला स्रोत बना रहा। भारत को इस फैसले से बड़ा आर्थिक लाभ मिला। सरकार के अनुसार, रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर भारत ने आम नागरिकों के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने में सफलता पाई है। इससे महंगाई पर भी नियंत्रण रहा।
ट्रंप के बयान पर MEA का जवाब
हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में दावा किया था कि जब वे राष्ट्रपति थे, तब उन्होंने नरेंद्र मोदी से रूस से तेल खरीद को लेकर बातचीत की थी। इस पर MEA ने कहा कि यह मामला पुराना है और भारत किसी भी देश से बातचीत करते समय अपने हितों को सर्वोच्च रखता है। MEA प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा – “भारत किसी भी बाहरी दबाव में निर्णय नहीं लेता। रूस से तेल खरीद पूरी तरह भारत की रणनीतिक नीति का हिस्सा है।”
भारत की ऊर्जा जरूरत और आत्मनिर्भरता की दिशा
भारत की ऊर्जा जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं। देश में औद्योगिक विकास, परिवहन और घरेलू उपयोग के लिए बड़ी मात्रा में तेल की आवश्यकता होती है। इसी कारण भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों को विविध बना रहा है। रूस से तेल खरीद भारत को इस दिशा में मजबूती देती है। मोदी सरकार ने स्पष्ट किया है कि “ऊर्जा सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा” का हिस्सा है। भारत सस्ते और भरोसेमंद स्रोतों से तेल लेकर अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रहा है।
रूस-भारत रिश्तों की मजबूती
रूस और भारत के बीच दोस्ती दशकों पुरानी है। दोनों देशों ने रक्षा, अंतरिक्ष, व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत साझेदारी बनाई है। जब पश्चिमी देशों ने रूस से दूरी बनाई, तब भी भारत ने अपने रिश्ते बनाए रखे। इसने दोनों देशों के बीच विश्वास और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया। रूस ने भारत को लगातार सस्ती दरों पर तेल, गैस और कोयला सप्लाई किया, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को सहारा मिला।

अमेरिका के दबाव पर भारत का रुख
अमेरिका और यूरोपीय देशों ने कई बार भारत से कहा कि वह रूस से तेल खरीद कम करे। लेकिन मोदी सरकार ने हर बार स्पष्ट कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत गरीबों और मिडिल क्लास परिवारों की जरूरतें देखकर निर्णय लेता है, किसी के दबाव में नहीं। यही कारण है कि भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा और साथ ही अमेरिका व यूरोप के साथ मजबूत संबंध भी बनाए रखे।
MEA का बयान – अफवाहों पर न जाए देश
विदेश मंत्रालय ने मीडिया से भी अपील की कि इस मुद्दे को गलत तरीके से न पेश किया जाए। मंत्रालय ने कहा कि भारत का तेल व्यापार पूरी तरह पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार है। MEA ने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति पूरी तरह संतुलित और स्वतंत्र है। न तो भारत रूस के खिलाफ जाएगा और न ही किसी के दबाव में अपना रुख बदलेगा।
रूस से तेल खरीद पर भारत का गणित
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। हर दिन भारत को लगभग 5 मिलियन बैरल तेल की जरूरत होती है। इसमें से बड़ी मात्रा रूस से आती है। रूस भारत को डिस्काउंट पर तेल बेचता है, जिससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बचता है और महंगाई पर नियंत्रण रहता है। मोदी सरकार ने यह रणनीति अपनाकर देश की आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।
ट्रंप के दावे की सच्चाई
MEA के बयान के बाद यह साफ हो गया कि ट्रंप का दावा केवल राजनीतिक बयान था। भारतीय अधिकारियों ने बताया कि मोदी और ट्रंप के बीच कई विषयों पर बातचीत होती रही, लेकिन तेल खरीद पर कोई निजी वादा या सौदा नहीं हुआ था। दोनों नेताओं के बीच हमेशा सम्मानजनक और सकारात्मक संबंध रहे हैं। MEA ने यह भी कहा कि भारत अपने हर रिश्ते में पारदर्शिता और सम्मान की नीति अपनाता है।
मोदी की नीति – आत्मनिर्भर भारत की राह
प्रधानमंत्री मोदी ने बार-बार कहा है कि भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि ऊर्जा उत्पादक देश बनना चाहता है। रूस से सस्ता तेल लेकर भारत न केवल अपनी जरूरत पूरी कर रहा है, बल्कि उसे रिफाइन करके दूसरे देशों को भी बेच रहा है। इससे भारत को विदेशी मुद्रा में बड़ा फायदा हो रहा है। यही “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में एक बड़ा कदम है।
नतीजा – भारत की नीति पर दुनिया की नजर
आज पूरी दुनिया भारत की ऊर्जा नीति की तारीफ कर रही है। अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देश मानते हैं कि भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर अपने नागरिकों को राहत दी है और आर्थिक मजबूती भी हासिल की है। MEA के ताजा बयान से यह एक बार फिर साबित हुआ कि भारत अपने फैसले खुद करता है और किसी दबाव में नहीं आता।
MEA ने फिर दोहराया भारत का स्टैंड – रूस से तेल खरीद पर कोई समझौता नहीं
MEA (विदेश मंत्रालय) ने एक बार फिर साफ कहा है कि भारत रूस से तेल खरीद अपने राष्ट्रीय हित के तहत कर रहा है और इसमें किसी भी देश से सलाह या दबाव का सवाल ही नहीं उठता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा कहा है कि भारत की प्राथमिकता जनता का हित है। डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर भी मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति किसी दूसरे देश के प्रभाव में नहीं बनती। यह बयान दर्शाता है कि मोदी सरकार भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता को लेकर कितनी गंभीर है।
निष्कर्ष – मोदी सरकार का आत्मविश्वासी रुख
रूस से तेल खरीद पर मोदी ने ट्रंप को क्या वादा किया, इस सवाल का जवाब अब साफ है — भारत ने कोई निजी वादा नहीं किया था। विदेश मंत्रालय का बयान बताता है कि मोदी सरकार हर कदम पर भारत के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। भारत ने जो भी किया, अपने नागरिकों और अर्थव्यवस्था के लिए किया। यही नीति प्रधानमंत्री मोदी की सबसे बड़ी ताकत है, जिसने भारत को वैश्विक ऊर्जा राजनीति में एक मजबूत खिलाड़ी बना दिया है।
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