Crypto Market Crash 19 Billion: क्रिप्टो मार्केट में गिरावट
क्रिप्टो मार्केट में बीते 24 घंटों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। लगभग 19 अरब डॉलर का नुकसान सिर्फ एक दिन में हो गया। बिटकॉइन, एथेरियम, सोलाना और कार्डानो जैसी बड़ी क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में भारी गिरावट आई। इस अचानक आई मंदी ने दुनियाभर के निवेशकों को चौंका दिया है। हालांकि, दिलचस्प बात यह रही कि भारतीय निवेशकों ने इस गिरावट को मौके में बदल दिया और खरीदारी बढ़ा दी।

बिटकॉइन की कीमत गिरी
क्रिप्टो मार्केट की सबसे बड़ी करेंसी बिटकॉइन (Bitcoin) की कीमत में लगभग 4% की गिरावट देखी गई। कुछ समय पहले तक यह $68,000 के ऊपर ट्रेड कर रहा था, लेकिन अब यह $65,000 के आसपास आ गया है। इस गिरावट के कारण मार्केट कैप में अरबों डॉलर का नुकसान हुआ। कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट ग्लोबल इकोनॉमिक टेंशन और अमेरिकी ब्याज दरों से जुड़ी है।
एथेरियम और अन्य कॉइंस
बिटकॉइन के साथ-साथ एथेरियम (Ethereum) की कीमत में भी 3.5% की गिरावट दर्ज हुई। सोलाना (Solana), कार्डानो (Cardano), और डॉजकॉइन (Dogecoin) जैसी करेंसीज में भी भारी गिरावट आई।
जहां सोलाना 6% टूटा, वहीं कार्डानो में करीब 5% की गिरावट रही। मार्केट के छोटे टोकन जैसे शिबा इनु (Shiba Inu) और पोलकाडॉट (Polkadot) भी इस झटके से नहीं बच पाए।

इंडियन इनवेस्टर्स का रुख
जहां दुनियाभर के निवेशक घबराकर अपने पैसे निकालने लगे, वहीं भारतीय निवेशकों ने इसका फायदा उठाया। भारत में CoinSwitch, WazirX और CoinDCX जैसी क्रिप्टो एक्सचेंजों पर खरीदारी में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
भारतीय निवेशकों ने माना कि मार्केट में यह गिरावट अस्थायी है, और आने वाले महीनों में क्रिप्टो की कीमतें फिर ऊपर जा सकती हैं। कई लोगों ने बिटकॉइन और एथेरियम को “डिप में खरीदने” का मौका समझा।
ग्लोबल फैक्टर्स का असर
क्रिप्टो मार्केट की यह गिरावट सिर्फ तकनीकी कारणों से नहीं आई। इसके पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां, डॉलर की मजबूती और तेल की बढ़ती कीमतें भी कारण मानी जा रही हैं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक रिस्क वाली संपत्तियों जैसे क्रिप्टो से पैसा निकालकर सुरक्षित जगह लगाते हैं।
साथ ही, चीन और यूरोप की आर्थिक स्थिति भी निवेशकों को चिंतित कर रही है।
मार्केट में डर का माहौल
इस गिरावट के बाद क्रिप्टो फियर एंड ग्रीड इंडेक्स (Crypto Fear & Greed Index) में भी बदलाव देखने को मिला। यह इंडेक्स निवेशकों के मूड को दर्शाता है। पिछले हफ्ते तक यह 65 के स्तर पर था, यानी निवेशक लालच की स्थिति में थे। लेकिन अब यह घटकर 45 पर आ गया, जो बताता है कि डर और सतर्कता बढ़ गई है।
क्या ये सिर्फ करेक्शन है?
कई क्रिप्टो एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट करेक्शन (Correction) है, न कि क्रैश।
मार्केट में जब तेजी लंबे समय तक चलती है, तो बीच में एक समय ऐसा आता है जब कीमतें थोड़ी नीचे आती हैं। यह स्वाभाविक प्रोसेस है ताकि मार्केट बैलेंस बना रहे।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिटकॉइन की लंबी अवधि की ग्रोथ अब भी मजबूत है और यह साल के अंत तक $75,000 तक जा सकता है।
इंडियन निवेशकों की उम्मीदें
भारत में क्रिप्टो को लेकर रुझान लगातार बढ़ रहा है। कई युवा निवेशक और ट्रेडर्स इसे डिजिटल गोल्ड मानते हैं।
गिरावट के बावजूद, भारत में बिटकॉइन, एथेरियम और सोलाना जैसी करेंसीज की खरीदारी बढ़ी है।
लोगों का कहना है कि जब तक कोई बड़ी ग्लोबल पॉलिसी शिफ्ट नहीं होती, तब तक क्रिप्टो का भविष्य उज्ज्वल है।
एक्सचेंजों का बयान
भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंज WazirX ने कहा कि मार्केट में गिरावट के बावजूद ट्रेडिंग वॉल्यूम 20% तक बढ़ा है। इसका मतलब है कि लोग गिरावट में खरीदारी कर रहे हैं।
CoinSwitch के अनुसार, भारत में लगभग 60% निवेशक अब भी लॉन्ग-टर्म होल्डर्स हैं, जो अपनी करेंसी बेचने के बजाय और खरीद रहे हैं।
सरकारी नीतियों का असर
भारत में क्रिप्टो पर नियम और टैक्स पॉलिसी अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। 30% टैक्स और 1% TDS के बावजूद निवेशकों का उत्साह कम नहीं हुआ है।
सरकार ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में क्रिप्टो को लेकर स्पष्ट रेगुलेशन लाए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह इंडियन क्रिप्टो मार्केट के लिए बहुत बड़ा कदम साबित होगा।
भविष्य की दिशा
क्रिप्टो मार्केट में फिलहाल उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले 3–6 महीनों में बिटकॉइन फिर से रिकवरी दिखा सकता है।
साथ ही, 2026 में संभावित बिटकॉइन हॉल्विंग (Bitcoin Halving) से पहले मार्केट में एक नई तेजी देखने को मिल सकती है।
कई एनालिस्ट मानते हैं कि यह गिरावट लॉन्ग-टर्म इनवेस्टर्स के लिए बेहतरीन एंट्री पॉइंट है।
निष्कर्ष
क्रिप्टो मार्केट में 19 अरब डॉलर का नुकसान भले ही बड़ा झटका लगे, लेकिन यह क्रिप्टो की अस्थिर प्रकृति का हिस्सा है।
जहां विदेशी निवेशक घबराए, वहीं भारतीयों ने इसे मौके के रूप में देखा।
अगर भारत में रेगुलेशन स्पष्ट होते हैं, तो आने वाले वर्षों में देश का क्रिप्टो मार्केट दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला बन सकता है।

