बलूचिस्तान में कार बम धमाके और नेपाल के पूर्व पीएम ओली की नई राजनीतिक
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हुए दो कार बम धमाकों ने पूरे इलाके को दहला दिया, वहीं दूसरी ओर नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ सीपीएन-यूएमएल के वरिष्ठ नेता केपी शर्मा ओली सैनिक बैरक से बाहर आकर एक बार फिर सक्रिय राजनीति में कदम बढ़ाते दिखे। दोनों घटनाएँ अपने-अपने देशों की राजनीति और सुरक्षा हालात पर गहरी छाप छोड़ने वाली हैं। आइए विस्तार से समझते हैं।
बलूचिस्तान
बलूचिस्तान में दो कार बम धमाके: 8 की मौत, कई घायल
पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत पहले से ही आतंकी हिंसा और अलगाववादी गतिविधियों का गढ़ माना जाता रहा है। ताज़ा खबरों के मुताबिक़, शुक्रवार को प्रांत के अलग-अलग इलाकों में दो कार बम धमाके हुए। इन धमाकों में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके इतने ज़ोरदार थे कि आसपास खड़ी गाड़ियों और इमारतों को भी भारी नुकसान पहुँचा। धमाकों के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। घायलों को नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहाँ कुछ की हालत नाज़ुक बताई जा रही है।
कौन है इसके पीछे?
बलूचिस्तान में लंबे समय से अलगाववादी संगठन और आतंकवादी समूह सक्रिय हैं। कई बार ये संगठन पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को निशाना बनाते रहे हैं। हालाँकि अभी तक किसी संगठन ने इन धमाकों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इसमें वही पुराने आतंकी नेटवर्क शामिल हो सकते हैं जो बलूचिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय चिंता
इन धमाकों ने एक बार फिर पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पाकिस्तान पहले ही आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है, और ऐसे में इस तरह की घटनाएँ देश की छवि को और नुकसान पहुँचाती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बलूचिस्तान के हालात को लेकर चिंता जताई जा रही है।
नेपाल की राजनीति: केपी शर्मा ओली सैनिक बैरक से बाहर
पड़ोसी देश नेपाल में भी राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के वरिष्ठ नेता केपी शर्मा ओली हाल ही में सैनिक बैरक से बाहर आ गए हैं। यह कदम नेपाल की राजनीति में एक नए मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
क्यों थे ओली सैनिक बैरक में?
ओली पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य कारणों और राजनीतिक परिस्थितियों की वजह से सक्रिय राजनीति से थोड़ा दूर थे। वे सैनिक बैरक में रहकर पार्टी गतिविधियों पर सीमित रूप से नज़र बनाए हुए थे। लेकिन अब उनके बाहर आने का मतलब है कि वे आने वाले दिनों में नेपाल की राजनीति में फिर से बड़ा रोल निभाने के लिए तैयार हैं।
नेपाल की राजनीति पर असर
नेपाल की राजनीति वैसे ही लगातार अस्थिर रही है। बार-बार सरकार बदलने और गठबंधन टूटने की वजह से जनता में निराशा का माहौल है। ऐसे में ओली का दोबारा सक्रिय होना सत्ता समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। उनकी पार्टी सीपीएन-यूएमएल पहले भी मजबूत स्थिति में रही है और ओली अपने कड़े फैसलों और सख्त रवैये के लिए जाने जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की राजनीति में आने वाले महीनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, और उसमें ओली की भूमिका अहम रहेगी।
क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल
बलूचिस्तान के धमाके और नेपाल की राजनीति में ये ताज़ा हलचलें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि दक्षिण एशिया का इलाका अभी भी स्थिरता से काफी दूर है।
पाकिस्तान में आतंकी घटनाएँ न सिर्फ़ उसके भीतर की समस्याओं को उजागर करती हैं, बल्कि पड़ोसी देशों की सुरक्षा पर भी असर डालती हैं।
नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता वहाँ की आर्थिक प्रगति और जनता के विश्वास पर सीधा असर डालती है।
भारत जैसे पड़ोसी देशों के लिए भी ये घटनाएँ अहम हैं क्योंकि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता का सीधा संबंध यहाँ के व्यापार, सुरक्षा और सामरिक हितों से जुड़ा होता है।
निष्कर्ष
बलूचिस्तान में हुए बम धमाकों ने यह दिखा दिया कि आतंकवाद अभी भी पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। वहीं, नेपाल में केपी शर्मा ओली का सैनिक बैरक से बाहर आना वहाँ की राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है। दोनों घटनाएँ भले ही अलग-अलग देशों से जुड़ी हों, लेकिन इनके असर पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर पड़े बिना नहीं रहेंगे। आने वाले दिनों में देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान सुरक्षा संकट से कैसे निपटता है और नेपाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।