Supreme Court Diwali Firecrackers 2025: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली-NCR के लोगों के चेहरों पर मुस्कान लौटा दी है। कई वर्षों के बाद दिवाली पर पटाखे फोड़ने की अनुमति दी गई है। कोर्ट ने साफ कहा है कि लोग खुशियां मनाने का अधिकार रखते हैं, लेकिन यह जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। यह फैसला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि पिछले कई सालों से दिल्ली में दिवाली का मतलब सिर्फ दीये और रोशनी तक सीमित हो गया था, पटाखों की आवाज़ें लगभग खत्म हो गई थीं।

वर्षों की रोक खत्म
दिल्ली और एनसीआर में पटाखों पर 2017 से लगातार रोक लगी हुई थी। उस समय अदालत ने कहा था कि दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर है, और पटाखे जलाने से हवा और जहरीली हो जाती है। इसके बाद हर साल दिवाली से पहले प्रशासन पटाखों पर बैन की घोषणा कर देता था। लोग अपने त्योहार को अधूरा मानते थे क्योंकि पटाखे फोड़ने की परंपरा बचपन से ही दिवाली की खुशियों का हिस्सा रही है।
इस बार सुप्रीम कोर्ट ने जनता की भावनाओं को समझते हुए कहा कि परंपराएं और पर्यावरण दोनों का संतुलन जरूरी है। इसी कारण कुछ शर्तों के साथ पटाखे फोड़ने की अनुमति दी गई है।
कोर्ट की शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने यह अनुमति बिना शर्त नहीं दी है। अदालत ने साफ निर्देश दिए हैं कि केवल “ग्रीन पटाखे” ही जलाए जा सकते हैं। इन पटाखों से आवाज़ और धुआं कम निकलता है तथा ये पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि पटाखे फोड़ने का समय सीमित रहेगा ताकि हवा की गुणवत्ता पर ज्यादा असर न पड़े।
निर्धारित समय में ही लोग पटाखे फोड़ सकेंगे और यह जिम्मेदारी प्रशासन की होगी कि वह यह सुनिश्चित करे कि कोई भी नियम का उल्लंघन न करे।
दिल्ली वालों की खुशी
इस फैसले के बाद दिल्ली-NCR के लोगों में जबरदस्त खुशी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करते हुए लिखा कि आखिरकार दिवाली फिर से ‘दिवाली’ बन गई है। कई लोगों ने कहा कि यह त्योहार अब पहले की तरह रौनक लेकर आएगा।
बच्चे और युवा वर्ग सबसे ज्यादा उत्साहित हैं। स्कूल-कॉलेजों में भी इस फैसले को लेकर चर्चा हो रही है। कई अभिभावकों ने कहा कि यदि यह फैसला जिम्मेदारी के साथ लागू किया गया तो प्रदूषण पर नियंत्रण रखते हुए त्योहार की भावना को भी जिंदा रखा जा सकेगा।
प्रदूषण पर चिंता
हालांकि कुछ पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस फैसले पर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि दिल्ली की हवा पहले से ही बहुत खराब है और दिवाली के बाद एयर क्वालिटी ‘खतरनाक’ स्तर पर पहुंच जाती है। उनका मानना है कि भले ही यह ग्रीन पटाखे हों, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर इनके इस्तेमाल से प्रदूषण बढ़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कहा कि अगर किसी भी तरह के नियमों का उल्लंघन पाया गया या प्रदूषण में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई, तो अनुमति तुरंत वापस ली जा सकती है।
प्रशासन की तैयारी
दिल्ली सरकार और एनसीआर के प्रशासन ने कोर्ट के आदेश के बाद तैयारी शुरू कर दी है। पर्यावरण विभाग की टीमों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे बाजारों में केवल ग्रीन पटाखों की बिक्री सुनिश्चित करें। लाइसेंस वाले दुकानदारों को ही पटाखे बेचने की अनुमति दी जाएगी।
पुलिस विभाग को भी यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह यह देखे कि किसी भी इलाके में प्रतिबंधित पटाखे न जलाए जाएं। निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा।
ग्रीन पटाखे क्या हैं
ग्रीन पटाखे असल में ऐसे पटाखे होते हैं जिनमें सल्फर और अन्य जहरीले रसायनों का प्रयोग नहीं किया जाता। इनसे निकलने वाला धुआं कम होता है और आवाज़ भी सीमित स्तर पर होती है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इन पटाखों से 30% से 40% तक प्रदूषण कम होता है।
ग्रीन पटाखे पहचानने के लिए एनएएल (National Environmental Engineering Research Institute) द्वारा एक विशेष लोगो दिया गया है, जो इन पर छपा होता है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इन्हीं पटाखों को जलाने की अनुमति होगी।
व्यापारियों की राहत
इस फैसले से पटाखा कारोबारियों को भी बड़ी राहत मिली है। पिछले कुछ वर्षों से उनके व्यवसाय पर रोक की वजह से भारी नुकसान हुआ था। अब उन्हें उम्मीद है कि दिवाली पर बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी।
कई व्यापारियों ने कहा कि अगर सरकार समय पर नियमों की जानकारी और लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बना दे तो यह निर्णय सबके लिए लाभकारी होगा।
लोगों से अपील
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि लोगों को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समझना होगा। अदालत ने जनता से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और प्रदूषण को नियंत्रित रखने में प्रशासन का साथ दें।
कोर्ट ने कहा कि “त्योहार की खुशी तभी सच्ची होगी जब किसी को नुकसान न पहुंचे।” इसलिए अगर कोई व्यक्ति गैरकानूनी पटाखे जलाता है या निर्धारित समय से बाहर ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों की राय
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला “संतुलित दृष्टिकोण” के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर लोग सीमित मात्रा में और तय समय में पटाखे जलाते हैं, तो इससे पर्यावरण को उतना बड़ा खतरा नहीं होगा जितना पहले होता था।
डॉक्टरों ने भी सलाह दी है कि जिन लोगों को अस्थमा या सांस की बीमारियां हैं, वे इस दौरान घर के अंदर रहें और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा देर तक धुएं वाले वातावरण में न रहने की सलाह दी गई है।
सोशल मीडिया पर चर्चा
फैसले के बाद ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #DiwaliWithCrackers और #SupremeCourtDecision जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। लोगों ने मीम्स, वीडियो और पोस्ट के जरिए अपनी खुशी जाहिर की। कुछ यूजर्स ने लिखा कि “अब फिर से बचपन वाली दिवाली लौट आई”, जबकि कुछ ने कहा कि “हमें खुशी है लेकिन जिम्मेदारी भी निभानी होगी।”
भविष्य की दिशा
यह फैसला सिर्फ एक अनुमति नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश है। सुप्रीम कोर्ट ने दिखाया कि परंपरा और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना संभव है, बस जरूरत है समझदारी और अनुशासन की।
अगर इस दिवाली लोग नियमों का पालन करते हुए ग्रीन पटाखे जलाते हैं, तो आने वाले वर्षों में यह एक नई और स्वच्छ परंपरा बन सकती है।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐतिहासिक इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह सिर्फ पटाखों की अनुमति नहीं, बल्कि जनता में विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है। अब यह जनता पर निर्भर है कि वह इस भरोसे को कायम रखे।
अगर दिल्ली-NCR के लोग मिलकर इस नियम का पालन करते हैं, तो यह दिवाली केवल रोशनी ही नहीं बल्कि जिम्मेदारी की भी मिसाल बनेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपना कर्तव्य निभाया है, अब बारी जनता की है कि वह “ग्रीन दिवाली” को सच में सफल बनाए।