Sachin Tendulkar Stock News: 57,000% बढ़ा शेयर – निवेशकों के होश उड़ गए
भारतीय शेयर मार्केट में हर दिन उतार-चढ़ाव होता रहता है, लेकिन कभी-कभी कुछ शेयर ऐसे प्रदर्शन करते हैं कि लोग अविश्वास में पड़ जाते हैं। हाल ही में एक ऐसी ही कंपनी का शेयर चर्चा में आ गया जब उसने सिर्फ 18 महीनों में 57,000% का रिटर्न दिया।
इस अद्भुत बढ़त ने न केवल आम निवेशकों को चौंका दिया बल्कि मार्केट एक्सपर्ट्स भी सोच में पड़ गए कि आखिर ऐसा कैसे हुआ।
सोशल मीडिया पर इस शेयर को लेकर इतनी चर्चा हुई कि लोगों ने मान लिया कि इसका किसी न किसी तरह से सचिन तेंदुलकर से कनेक्शन है।

कैसे शुरू हुई यह कहानी – एक छोटे शेयर की बड़ी उड़ान
यह मामला एक स्मॉल-कैप कंपनी का है, जिसका नाम शुरुआत में किसी को खास पता भी नहीं था। कंपनी का शेयर कुछ समय पहले तक मात्र ₹2 के आस-पास ट्रेड कर रहा था।
लेकिन धीरे-धीरे यह ₹1,100 से ऊपर पहुंच गया। यानी जिसने सिर्फ ₹10,000 का निवेश किया, उसके पैसे कुछ ही महीनों में लाखों, बल्कि करोड़ों तक पहुंच गए।
ऐसी ग्रोथ ने मार्केट में हलचल मचा दी। लोगों ने सोशल मीडिया पर शेयर के स्क्रीनशॉट्स डालना शुरू कर दिए और दावे करने लगे कि यह सचिन तेंदुलकर से जुड़ी कंपनी है।
सचिन तेंदुलकर का नाम क्यों आया बीच में?
दरअसल, इस कंपनी के प्रमोटर्स ने अपने कुछ उत्पादों के नाम में “SRT” का इस्तेमाल किया था।
SRT का मतलब “Sachin Ramesh Tendulkar” माना गया, क्योंकि यही नाम क्रिकेट लीजेंड सचिन तेंदुलकर के शुरुआती अक्षर हैं।
लोगों ने बिना जांचे यह अफवाह फैला दी कि सचिन इस कंपनी में या तो निवेशक हैं या फिर ब्रांड एंबेसडर के रूप में जुड़े हुए हैं।
इस बात ने बाजार में आग की तरह फैलकर छोटे निवेशकों को आकर्षित किया और शेयर की कीमतें तेजी से आसमान छूने लगीं।
कंपनी का बयान – सचिन तेंदुलकर से कोई रिश्ता नहीं
जैसे-जैसे मामला बढ़ा, कंपनी को सामने आकर सफाई देनी पड़ी।
कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दिए बयान में कहा –
> “हम साफ करना चाहते हैं कि हमारा सचिन तेंदुलकर से कोई व्यावसायिक या व्यक्तिगत संबंध नहीं है। वे हमारे निवेशक, प्रमोटर या ब्रांड एंबेसडर नहीं हैं।”
कंपनी ने यह भी जोड़ा कि सोशल मीडिया पर फैली खबरें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी फेक न्यूज पर भरोसा न करें और निवेश करने से पहले कंपनी के असली डाटा और रिपोर्ट्स देखें।
मार्केट में हड़कंप – शेयर में आई तेज गिरावट
कंपनी का बयान आते ही शेयर की चमक फीकी पड़ने लगी।
मार्केट ओपन होते ही शेयर में 10% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों में डर फैल गया कि कहीं यह सब सिर्फ एक अफवाह पर आधारित न हो।
कई बड़े निवेशकों ने तुरंत अपने शेयर बेच दिए, जिससे शेयर प्राइस में और गिरावट आ गई।
कुछ ही दिनों में यह शेयर 20% तक नीचे आ गया, जिससे छोटे निवेशकों को बड़ा झटका लगा।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना – यह है ‘पंप एंड डंप’ का क्लासिक केस
स्टॉक मार्केट के जानकारों का कहना है कि इस तरह की तेजी सामान्य नहीं होती।
कभी-कभी पंप एंड डंप स्ट्रैटेजी के तहत कुछ बड़े निवेशक मिलकर शेयर की कीमतें बढ़ाते हैं ताकि लोग आकर्षित हों।
जब शेयर ऊपर पहुंच जाता है, तो ये निवेशक अपने शेयर बेच देते हैं और मुनाफा कमा लेते हैं।
ऐसे में जो लोग बाद में शेयर खरीदते हैं, वे नुकसान झेलते हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह केस भी उसी पैटर्न का हो सकता है, जहां अफवाह और भावनाओं ने शेयर की कीमतों को ऊपर पहुंचा दिया।
सचिन तेंदुलकर की टीम ने भी जारी किया बयान
जब अफवाहें लगातार बढ़ने लगीं, तो सचिन तेंदुलकर की पब्लिक रिलेशन टीम ने भी बयान जारी किया।
उन्होंने कहा –
> “सचिन तेंदुलकर का इस कंपनी से कोई भी संबंध नहीं है। उनका नाम बिना अनुमति इस्तेमाल करना गलत है और इसके खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे।”
सचिन तेंदुलकर का नाम जब किसी चीज से जुड़ता है, तो उस पर लोगों का भरोसा अपने आप बढ़ जाता है।
कई कंपनियां इसी भरोसे का फायदा उठाने की कोशिश करती हैं। लेकिन इस बार मामला सोशल मीडिया की अफवाहों से आगे निकल गया था।
57,000% बढ़ा शेयर – क्या सच में इतना मुनाफा संभव है?
किसी भी शेयर का 18 महीनों में 57,000% बढ़ना असाधारण है।
अगर कोई कंपनी वास्तव में इतनी तेजी से बढ़ती है, तो उसके वित्तीय आंकड़े और बिजनेस मॉडल भी उसी हिसाब से मजबूत होने चाहिए।
लेकिन इस कंपनी के केस में ऐसा नहीं था।
कंपनी का राजस्व सीमित था, मुनाफा भी बहुत कम और कारोबार छोटा।
इसलिए यह स्पष्ट था कि यह बढ़त असली बिजनेस ग्रोथ की वजह से नहीं बल्कि अफवाहों और सट्टेबाजी की वजह से हुई।
निवेशकों के लिए सबक – फेक न्यूज पर भरोसा न करें
SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने इस मामले पर नज़र रखी है।
निवेशकों को चेतावनी दी गई है कि वे किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले उसकी बैलेंस शीट, प्रमोटर की जानकारी और कंपनी की गतिविधियों की जांच करें।
सोशल मीडिया पर देखी गई किसी भी “मल्टीबैगर” टिप पर भरोसा करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।
विशेषज्ञ कहते हैं, “शेयर मार्केट में अफवाहों से पैसा नहीं, समझदारी से ही मुनाफा होता है।”
कंपनी की सफाई के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया
कई निवेशकों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए।
किसी ने कहा कि उन्होंने यह शेयर इसलिए खरीदा क्योंकि उन्हें लगा कि सचिन तेंदुलकर इसके साथ जुड़े हैं।
कुछ ने कहा कि यह उनकी गलती थी कि उन्होंने कंपनी की असली स्थिति जांचे बिना पैसा लगाया।
कुछ लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ा, जबकि कुछ शुरुआती निवेशक फायदा उठाकर बाहर निकल गए।
57,000% बढ़ा शेयर – लेकिन अब सावधानी जरूरी
इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि शेयर मार्केट में नाम और प्रचार सबसे खतरनाक चीजें हो सकती हैं।
अगर कोई कंपनी सच में ग्रोथ कर रही होती है, तो उसके नतीजे और रिपोर्ट्स भी उतने ही मजबूत दिखते हैं।
लेकिन जब किसी शेयर की कीमत बिना वजह बढ़ने लगती है, तो यह समझ लेना चाहिए कि कुछ गड़बड़ है।
ऐसे में निवेश करने के बजाय दूर रहना ही बेहतर होता है।
शेयर मार्केट में अफवाहों का असर
भारत में निवेशक तेजी से बढ़ रहे हैं।
लेकिन ज्यादातर नए निवेशक अभी भी अफवाहों के शिकार बन जाते हैं।
ट्विटर, टेलीग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर कई “शेयर गुरु” हर दिन नए मल्टीबैगर शेयर बताते हैं।
लोग बिना जांचे इन सलाहों पर भरोसा कर लेते हैं।
यह केस उसी का उदाहरण है कि कैसे एक फेक न्यूज किसी कंपनी को अचानक सुर्खियों में ला सकती है।
सचिन तेंदुलकर और कंपनी – अब मामला कानूनी मोड़ पर
सचिन तेंदुलकर की टीम ने साफ कहा है कि वे कानूनी कदम उठाएंगे।
अगर किसी कंपनी ने उनका नाम गलत तरीके से इस्तेमाल किया है तो यह ब्रांड इमेज को नुकसान पहुंचाने वाला अपराध है।
सचिन की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि उनके नाम से कोई भी चीज तुरंत वायरल हो जाती है, और इसी वजह से कंपनियां या अफवाह फैलाने वाले लोग इसका फायदा उठाते हैं।
निष्कर्ष – निवेश से पहले जानकारी जरूरी
इस पूरे मामले ने एक बार फिर साबित किया है कि शेयर मार्केट में समझदारी ही सबसे बड़ा हथियार है।
कोई भी शेयर कितना भी बढ़ जाए, निवेश करने से पहले कंपनी की असली स्थिति जानना जरूरी है।
सिर्फ इसलिए किसी शेयर में पैसा न लगाएं क्योंकि उसमें किसी बड़े नाम का अफवाहों के जरिए संबंध बताया जा रहा है।
57,000% बढ़ा शेयर सुनने में भले आकर्षक लगे, लेकिन इसके पीछे छिपा सच अक्सर नुकसानदायक साबित होता है।
निवेशक तभी सुरक्षित रह सकते हैं जब वे हर खबर को जांचने के बाद ही कदम उठाएं।