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जीएसटी हटते ही खाने का तेल हुआ सस्ता, कीमत में ₹60 तक की गिरावट | Cooking Oil Price Drop 2025

जीएसटी हटते ही खाने का तेल हुआ सस्ता, कीमत में ₹60 तक की गिरावट | Cooking Oil Price Drop 2025

भारत में लगातार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ रखा था। खासकर खाने का तेल (Cooking Oil ) की कीमतें पिछले कुछ सालों से परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही थीं। लेकिन साल 2025 में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए एक बड़े फैसले के बाद उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। सरकार ने खाने के तेल पर लगने वाला गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) पूरी तरह हटा दिया है। इसके चलते बाजार में तेल की कीमतों में ₹40 से ₹60 प्रति लीटर तक की गिरावट देखने को मिल रही है।

यह कदम न सिर्फ आम उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद है, बल्कि इससे खाद्य उद्योग, छोटे दुकानदार और होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर को भी राहत मिली है। आइए विस्तार से जानते हैं कि जीएसटी हटने के बाद खाने के तेल की कीमतों में कितनी गिरावट आई, इसका उपभोक्ताओं और बाजार पर क्या असर होगा, और क्यों सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया।

Cooking Oil Price Drop 2025
Cooking Oil Price Drop 2025

खाने के तेल पर जीएसटी क्यों हटाया गया?

सरकार को लगातार यह फीडबैक मिल रहा था कि खाने-पीने की बुनियादी वस्तुओं पर टैक्स लगाना सीधे तौर पर गरीब और मिडिल क्लास परिवारों पर बोझ डालता है। चूंकि खाने का तेल हर रसोई की जरूरी वस्तु है, इसलिए इस पर लगने वाला 5% जीएसटी लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा था।

महंगाई को काबू में रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए जीएसटी काउंसिल ने सितंबर 2025 की बैठक में निर्णय लिया कि सभी प्रकार के Edible Oils – जैसे सरसों तेल, सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल, रिफाइंड ऑयल, मूंगफली तेल और पाम ऑयल – को जीएसटी मुक्त (Zero GST) कर दिया जाएगा।

कीमतों में आई कितनी गिरावट?

जीएसटी हटते ही खुदरा बाजार में तेल की कीमतें तेजी से नीचे आईं। पहले जहाँ रिफाइंड सोयाबीन तेल ₹160-165 प्रति लीटर बिक रहा था, वहीं अब यह ₹105-110 प्रति लीटर तक मिल रहा है। इसी तरह, सरसों का तेल जो ₹170-175 प्रति लीटर था, अब ₹115-120 प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

प्रमुख तेलों की कीमतों में बदलाव (2025):

सोयाबीन तेल: पहले ₹160 → अब ₹105-110

सरसों का तेल: पहले ₹175 → अब ₹115-120

सूरजमुखी तेल: पहले ₹165 → अब ₹110-115

पाम ऑयल: पहले ₹140 → अब ₹90-95

मूंगफली तेल: पहले ₹180 → अब ₹125-130

औसतन देखें तो सभी प्रकार के तेल में ₹40 से ₹60 प्रति लीटर तक की गिरावट दर्ज की गई है।

उपभोक्ताओं को सीधा लाभ

1. रसोई का बजट हुआ हल्का

हर महीने का किराने का खर्च अब पहले की तुलना में काफी कम हो जाएगा। चार से पांच लीटर तेल का मासिक उपयोग करने वाले परिवारों को सीधे ₹200 से ₹300 की बचत होगी।

2. होटल और ढाबों को फायदा

रेस्टोरेंट, होटल और ढाबों में खाने का तेल बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होता है। जीएसटी हटने के बाद इन व्यवसायों की लागत घटी है, जिससे ग्राहकों को भी कम दाम पर खाना मिल सकेगा।

3. खाद्य उद्योग को राहत

पैकेज्ड फूड और स्नैक बनाने वाली कंपनियों को तेल की कीमतों में कमी से बड़ा लाभ हुआ है। इससे उनकी उत्पादन लागत घटेगी और उपभोक्ताओं तक सस्ते प्रोडक्ट पहुँच पाएंगे।

सरकार का मकसद क्या है?

इस निर्णय के पीछे सरकार के दो मुख्य उद्देश्य बताए जा रहे हैं:

1. महंगाई पर नियंत्रण – खाने का तेल रोजमर्रा की जरूरी वस्तु है, इसकी कीमत घटने से महंगाई का दबाव काफी हद तक कम होगा।

2. जनता को सीधा लाभ – जीएसटी हटाकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि वह जनता की जेब का ख्याल रखती है और बुनियादी वस्तुओं को सस्ता बनाना चाहती है।

विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आम उपभोक्ता के लिए तो बेहद सकारात्मक है, लेकिन साथ ही इससे तेल की खपत भी बढ़ सकती है। कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि लोग कीमत कम होने पर अधिक तेल का उपयोग न करें और हेल्दी ऑयल का चयन करें।

आने वाले समय का असर

लघु उद्योग और व्यापारियों को राहत मिलेगी क्योंकि उन्हें अब टैक्स कम्प्लायंस की झंझट से छुटकारा मिलेगा।

ग्रामीण उपभोक्ता जिनके लिए तेल पहले महंगा पड़ता था, अब आसानी से खरीद पाएंगे।

महंगाई सूचकांक (CPI) पर सकारात्मक असर पड़ेगा और खाद्य मुद्रास्फीति में कमी आएगी।

निष्कर्ष

2025 में खाने के तेल पर जीएसटी हटाना सरकार का बेहद अहम कदम साबित हुआ है। इससे बाजार में तेल की कीमतों में ₹60 प्रति लीटर तक की गिरावट दर्ज की गई है। आम उपभोक्ता से लेकर व्यापारियों तक, सभी को इसका लाभ मिल रहा है। रसोई का बजट हल्का हुआ है, महंगाई पर काबू पाया गया है और लोगों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है।

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